Monday, 6 April 2026

हारा हुआ हूँ मैं

हारने के बाद क्या?

हारने के बाद क्या 

मौन हो जाना ही सबसे उपयुक्त है?

और मौन के बाद क्या?

क्या इस मौन के दौर में 

भीतर को शांत रखना 

आसान होता है?

और क्या आसान है 

जो भीतर है 

उसे बाहर छुपाना?

क्या ये दौर ही 

सबसे मुश्किल दौर कहा जाता है?

कहा जाता है और भी

बहुत कुछ

इस दौर के बारे में।

इस बहुत कुछ का 

कुछ कुछ लिखना चाहता हूँ ।

मैं भी हारा हुआ हूँ ।

बुझा हुआ चिराग


चिराग

जलती बुझती लौं के बीच 

बुझने  को है।

बुझने के बाद भी 

क्या,

उसे चिराग कहलाने का हक़ होगा।

रोशनी नहीं है।

बुझा हुआ चिराग 

ख़ुद की उपस्थिति 

दर्ज कराने में भी असमर्थ है।

जलते हुए उसने ख़ुद को 

ख़ाली किया 

किसी और के लिए 

जलते हुए की 

उसकी अहमियत 

अब उसे 

स्वयं भी महसूस नहीं होती।

मैं उसे 

‘बुझा हुआ चिराग’

कहूंगा अब